सी.बी.एन इन्डिया टी.वी
क्या आप कल्पना कर सकते हैं, एक ऐसे संसार की जिसमें न समाचार पत्र हों, न रेडियो हो, न टेलिविज़न हो न फिल्में हो और न ही इन्टरनेट हो ? क्या आप ऐसा जीवन पसन्द करेंगे ?
आज के युग में लोकमाध्यम के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
आधुनिक तकनीक न तो पूरी तरह अच्छी है और न पूरी तरह बुरी है। यह आशीष भी हो सकती है और श्राप भी। हालाँकि अनेक अवसरों पर लोग हिंसा तथा यौन प्रदर्शन के प्रसारण से जो लोकमाध्यम द्वारा प्रसारित होते हैं, बहुत ही क्रोधित होते हैं। पर अन्त में हार कर उस परेशानी से मानो समझौता कर के उस पर ध्यान नहीं देते हैं।
परन्तु इस कटु सत्य से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि लोकमाध्यम के अनेक गुणकारी उपयोग भी हैं। हम समाज, देश, और विदेश की घटनाओं के विषय में जानने के लिए लोकमाध्यम पर ही निर्भर करते हैं। उन सूचनाओं के लिए भी जो हमारे प्रतिदिन के जीवन पर प्रभाव डालती हैं। हम लोकमाध्यम का ही सहारा लेते हैं। लोकमाध्यम जन जीवन तक किसी भी संदेश को पहुँचाने के लिए तथा उसके द्वारा सकारात्मक एवं सर्वोत्तम उत्कर्ष प्राप्त करने के लिए और जनता तक यीशु का सुसमाचार पहुँचाने के लिए सब से उत्तम और सुगम उपाय है। ।
सी.बी.एन का जन्म भारत में इसी लिए हुआ था कि लोकमाध्यम के द्वारा यीशु का सुसमाचार जनता तक पहुँचाया जा सके। प्राथमिक रूप से टी.वी. पर अच्छे कार्यक्रम दिखा कर हर घर में यीशु के प्रेम तथा आशा का वह दीप जलाना ही सी.बी.एन का लक्ष्य है जो सब को अनन्त जीवन का आनन्द देता है।
सी.बी.एन ने 1995 में भारत में काम करना शुरू किया था। उस समय एक कम्पनी का निर्माण हुआ था जिसका नाम था सी.बी.एन मल्टी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड जो कम्पनी एक्ट (1956) के अनुसार हैद्राबाद, भारत में 2000 में स्थापित की गई थी। उसका टी.वी. प्रसारण के क्षेत्र में प्रवेश तो 1995 में ही हो गया था, जब 8 अक्तूबर को डी.डी. 2 पर उसके पहले कार्यक्रम फ़्लाइंग हाउस को प्रसारित किया गया था। तब से यह कार्यक्रम अनेक स्वदेशी भाषाओं में प्रसारित हो रहा है।
1997 में कार्यक्रमों का स्तर और ऊँचा हो गया और उन्हें लोगों ने पसंद भी किया। तब एक धारावाहिक दयासागर जो यीशु के जीवन पर आधारित है आरम्भ हुआ। जो डी.डी. 1 पर प्रसारित होता था। फिर दूसरा कार्यक्रम सुपर बुक का प्रसारण डी.डी. 2 पर शुरू किया गया। इन कार्यक्रमों के अतिरिक्त 700 क्लब्स का अन्तर राष्ट्रीय प्रतिरूप सप्ताह में 6 दिन होम टी.वी. पर प्रसारित किया जाने लगा। बाद में यही कार्यक्रम कई भारतीय भाषाओं में प्रसारित किया जाने लगा।
आज कल सी.बी.एन विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा भारत के उन सब लोगों को छू रही है, जिन के घरों में टी.वी. हैं। इन कार्यक्रमों में नाटक, सच्ची जीवन गाथाएँ, संगीत के कार्यक्रम, तथा बच्चों के कार्यक्रम सम्मिलित हैं। ये कार्यक्रम विभिन्न भाषाओं में भी प्रसारित किए जाते हैं। प्रत्येक सप्ताह में 5 कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है और ये सभी मुख्य टी.वी. चैनलों पर प्रसारित किए जाते हैं।
सभी कार्यक्रमों का निर्माण जन साधारण की रुचि को ध्यान में रख कर किया जाता है। हर कार्यक्रम संस्कृति, भावुक्ता, तथा सही सन्दर्भ को ध्यान में रख कर बनाया जाता है। ये कार्यक्रम लोगों की गवाहियों के द्वारा अन्य लोगों का परमेश्वर यीशु मसीह पर विश्वास को बढ़ाने हेतु प्रसारित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के साथ लोगों के साथ पत्रों द्वारा भी सम्पर्क स्थापित किया जाता है और टेलीफ़ोन द्वारा बातचीत करके सुझाव भी दिए जाते हैं।
हर कार्यक्रम का निर्माण नई तकनीक, नए विचार, श्रेष्ठता तथा सम्पूर्ण सत्य निष्ठा के साथ सी.बी.एन द्वारा किया जाता है।
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