सतीश दूबे
सतीश दूबे को झूठ बलने में कोई शंका नहीं होती थी। वह बिना आँख झपकाए बड़ी आसानी से झूठ बोल देता था। जब भी उसकी पत्नी उससे शराब पीने के बारे में बात करती तो वह लम्बी-लम्बी बातें खींचता रहता था। और सदा पीने के विषय में यही कहता था कि वह नहीं पीता है। इसके लिए वह बाइबल की भी कसमें का कर झूठ बोलता था।
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सतीश दूबे को झूठ बोलने में कोई शंका नहीं होती थी। वह तो बिना आँख झपकाए झूठ बोल लेता था। जब उसकी पत्नी उससे पीने के विषय में बात करती तब वह बड़ी लम्बी-लम्बी खेंचता रहता था। वह हर बात के लिए बाइबल की भी कसमें खा कर झूठ बोलता रहता था।
पर सतीश के झूठ ने उसका अधिक दिन तक साथ नहीं दिया। दीप्ती, उसकी पत्नी को समझ में आ गया कि उसका पति शराब पीता है और लगातार उससे झूठ बोलता आया है। परिस्थिति और भी बुरी हो गई जब सतीश ने अपनी नौकरी से भी हाथ धो लिए। उस दिन से हर दिन एक संघर्ष का दिन बन कर रह गया था। प्रत्येक दिन दीप्ती और उसका पति किसी न किसी विषय पर वाद-विवाद करते रहते थे। अन्त में वे धीरज की हर सीमा को पार कर गए।
तब दीप्ती ने निर्णय लिया कि वह अपने पति को छोड़ देगी। पर तभी उसे लगा कि एक है, जो वास्तव में उसकी सहायता कर सकता है। सो उसने अपने जीवन की परिस्थिति को यीशु के हाथों में सौंप दिया। दीप्ती निरन्तर अपने पति के लिए प्रार्थना करती रही पर वह निरन्तर शराब पीता रहा। फिर एक सुबह उसने बताया कि उसके पेट में बहुत दर्द है। जो हर घड़ी तेज़ होता जा रहा था। जब उसे जल्दी से अस्पताल ले जाया गया और वहाँ पर सारी जाँच की गई तो पता चला कि उसका अमाशय बुरी तरह से सड़ चुका था।
यह रोग अघिक शराब पीने के कारण होता है। सो सतीश के इस रोग का यही कारण था। उसके इलाज के लिए आश्यक्ता थी। उसके शरीर का जो भाग सड़ चुका था, उसे तुरन्त दवाओं तथा शल्य चिकित्सा की आवश्यक्ता थी। जिसके द्वारा सड़ा हुआ भाग शरीर से बाहर किया जा सके। सतीश का इलाज तुरन्त शुरू किया गया, पर दवाओं और सदमें से सतीश का शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था। उसकी मानसिक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने शल्य-चिकित्सा की तिथी कुछ आगे बढ़ा दी, और दीप्ती से उसे कुछ समय के लिए वापस घर ले जाने को कहा।
जब वह घर पर था तब चर्च के लोग उसका उत्साह बढ़ाने तथा उसके लिए प्रर्थना करने के लिए आए। जब वे प्रार्थना कर रहे थे, तब सतीश सोच रहा था कि उसने कितनी बार यीशु को धोखा दिया था। तब उसके मन में विचार आया कि उसे अपने सभी पापों की क्षमा माँग लेनी चाहिए। और उसी दिन सतीश ने अपना जीवन यीशु मसीह को समर्पित कर दिया है। वह दिन दीप्ती के जीवन का सबसे आनन्दमय दिन था। सतीश ने शराब को त्याग दिया। अब वह नियमित रूप से बाइबल भी पढ़ने लगा। तब उसने यीशु के साथ एक निजि सम्बन्ध स्थापित कर लिया। जैसे-जैसे वह यीशु के प्रेम में बढ़ने लगा उसे अपनी पत्नी के प्रेम का मूल्य भी पता लगने लगा और अब वह उसका बहुत आदर करने लगा क्योंकि उसने उसके साथ बड़ा कठिन समय भी बड़े धीरज के साथ बिताया था।
अन्त में वह दिन भी आया जब सतीश की शल्य चिकित्सा होनी थी। पर उस दिन एक चमत्कार हो गया। जब शल्य चिकित्सा के पहले की जाँच की गई तो पता चला कि उसे शल्य-चिकित्सा की कोई आवश्यक्ता नहीं थी।
वर्षों बीत गए हैं जब सतीश को अमाशय का दर्द हुआ था पर वह आज भी अच्छे स्वास्थ्य के साथ जीवन बिता रहा है। दीप्ती प्रभु यीशु की आभारी है कि उन्होंने उसके पति का जीवन पूरी तरह बदल दिया है और साथ साथ उसकी शादी को भी टूटने से बचा लिया था। आज उसका पूरा परिवार यीशु के प्रेम, आनन्द और शान्ति के साथ जीवन बिता रहा है।


