ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया
हमारा दर्शन
हमारा एक ही दर्शन है कि हम यीशु के प्रेम के कार्य को प्रकट कर सकें।
हमारा मिशन ( उद्देश्य )
हम दलित जातियों की सेवा के लिए समर्पित हैं। हम उनके लिए निम्न सेवाएँ करना चाहते हैं -
1. अच्छी स्वास्थ्य़ सेवा प्रदान करना
2. शिक्षा प्रदान करना
3. जीवन स्तर को ऊँचा उठाना
4. स्वच्छ पीने का पानी प्रदान करना
5. आपतकालीन सहयता प्रदान करना।
1998 में ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया ने अपना मिशन जन सेवा से शुरू किया था जिससे वे गरीब और दुखी ज़रूरतमंदो के जीवनों में अन्तर ला सकें। तब से ओ.बी.आई. नें अपनी सेवा को समर्पित किया है कि वह गरीब और ज़रूरतमन्दों को आशा, सांत्वना और सुरक्षा का आभास दिला सकें और गरीब और दलित जाति के लोगों के जीवन के स्तर को ऊँचा उठा सकें। ओ.बी.आई. पूरी लगन से कार्य कर रही है कि वह उन लोगों के जीवन में उन्नति ला सके जो आर्थिक रूप से कमज़ोर पाए जाते है। जो तिरस्कृत माने जाते हैं और राष्ट के उन कोनों में रहते हैं जहाँ तक पहुँचना भी सरल नहीं है। ओ.बी. आई. का कहना है कि हमारा लक्ष्य है कि हम लोगों तक पहुँच कर उनके जीवन को प्रभावित कर सकें जिस से उन के मनों को बदल कर उनके जीवन में अच्छे के लिए परिवर्तन ला सकें।
ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया का बारे में अधिक जानकारी
रामावती - निराशा से आशा का जन्म
रामावती के लिए गर्भ धारण करना एक बड़ी मुसीबत बन गया था क्यों कि उसका गाँव बाड़ की लपेट में था और कहीं भी कोई सूखा स्थान नहीं था जहां पर वह आराम कर सके। रामावती बाकाहारी गाँव में रहती थी जो बिहार के चम्पारन ज़िले के अधीन आता है।...
नरालक्ष्मी
नरालक्ष्मी बहुत दुखी थी क्योंकि उसे अपनी उस झुग्गी को छोड़ कर जाने वाली थी जहाँ पर वह अनेक सालों से रहती थी। वहाँ पर पानी की समस्या बहुत ही गम्भीर हो गई थी और वह इसी कारण को लेकर अपने रहने का स्थान बदल रहे...
अनुशा- अव कुछ शिकायत नहीं हैं
अनुशा 10वीं कक्षा में पढने वाली एक युवा लड़की थी। जो औनगोले के सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। उसके पिता एक कुली का काम करते थे जो बाज़ार में एक स्थान से दूसरे स्थान तक सामान ले कर जाते थे। वह दिन भर में मात्र 70 रु की कमा पाते...
अनुराधा – जो पीड़ा से बेसुध होकर टूट चुकी थी
अनुराधा से मिलना उसकी आयु के किसी भी बच्चे से मिलने के समान नहीं है। अनुराधा केवल 11 वर्ष की है पर इन 11 वर्षों में उसने जो देखा है और अनुभव किया है वह अनेक व्यसक अपने पूरे जीवन में अनुभव नहीं कर पाते हैं। अनुराधा बाबा साहिब और...
वत्तुवरिलापल्ली - अन्त में पानी मिल गया था !!!
वत्तुवरिलापल्ली गाँव आंध्र प्रदेश के महबूब नगर ज़िले में स्थित है। वहाँ पर 4000 से अधिक आदिवासी लोग रहते हैं जिस में मुख्य रूप से चेनचू तथा बंजारा जाति के लोग पाए जाते हैं। यह स्थान अन्नामलाई के पहाड़ी इलाके के जंगलों में स्थित...
ज़िगनिम - “मैंनें जीवन का जोश फिर से पा लिया था!!!”
ज़िगनिम अपने गाँव की जान था। अपनी आयु को ध्यान में रखते हुए वह एक बहुत की चुस्त और जोशीला व्यक्ति था। वह अपने स्कूल का एक रिटायर्ड अध्यापक था जो समाज सुधार के कार्य बहुत प्रेम से करता था। वह अपना अधिकतर समय दूसरों की सहायता तथा...
चिटनी बाई ने समय पर सहायता पाई
चिटनी बाई एक ऐसी समस्या का सामना कर रही थी जो उसकी सहन शक्ति से बाहर थी। वह केवल 26 वर्ष की थी। उसके पाँच बच्चे हैं और वह अपन सास के साथ रहती है। उसका पति यह कह कर पंजाब चला गया था कि वहाँ पर कोई अच्छी नौकरी कर लेगा जिससे कुछ...
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