आपदा में पीड़ा शमन का काम
किसी भी तरह की आपत्ति जैसे भूकम्प, बाढ, तूफान या कोई दुर्घटना बिना किसी चेतावनी के आ सकती है। इसकी तीव्रता का अनुमान कोई नही लगा सकता।
कोई भी विपत्ति रातो रात लोगों के जीवन को बदल देती है। और जो लोग भयंकर मौत से बच जाते है, उन्हें दुःखों से घिरे जीवन का सामना करना पडता है जिसमें, बीमारियाँ, भूख, गरीबी, है। पीड़ा शमन का काम जल्द ही करना पडता है और आप्रेशन ब्लेसिंग अक्सर पहला संगठन है जो पहले काम पर लग जाता है।
हम पीडा शमन का काम दो रूप में करते है। तत्कालीन मदद करते है जिसमें पीडित के स्वास्थ्य का ख्याल किया जाता है। जरूरी सामग्री जैसे खाना, पीने का पानी, बर्तन, चादर दिए जाते है। पत्थरों को हटाया जाता है। इसके पश्चात लोगों को पुनर्वासित करने का काम किया जाता है। भावनाओं पर काबू लाने के लिए राय, सलाह दी जाती है। जीविका के नित्य क्रम को शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
आज तक आप्रेशन ब्लेसिंग ने आसाम, उडिसा, गुजरात में, भवण्डर, बाड और भूकम्प ग्रस्त जगहो में काम किया है। आप्रेशन ब्लेसिंग, इंडिया, ने भारत और श्री लंका में भी काम किया जब इनके किनारे, सुनामी से प्रभावित हुए।
ओ.बी.आई. सदैव प्राकृतिक संकट के समय आहत लोगों को तत्कालीन सहायता प्रदान करने में सदा कार्यशील रहती है। 28 फरवरी 2010 तक ओ.बी.आई. ने 25000 लोगों को, 2000 परिवारों को फोगिंग बनाया, 1288 परिवारों को दवाई दी गई है, औ.बि.अई ने 12 सरकारी पाठशालों में 1700 बच्चों को मदद की हैं। वह जो आन्ध्र प्रदेश में है वह महाबूब नगर, कर्नूल, अलंपूर, निद्जूर, पंचलिंगाला, गुनटूर। और आहत लोगों की आवश्यक वस्तुएँ जैसे कपड़े, पकाने के चूल्हे, कम्बल, दवाएँ तथा चिकित्सा सहायता प्रदान की है। इस कार्य को प्रभावशाली बनाने के लिए ओ.बी.आई. किसी भी संकट के समय तुरन्त शिविर लगा कर सहायता प्रदान करती है। जैसे सुनामी, भूकम्प, बाढ़ आदि से ग्रसित क्षेत्रों में जिन में जम्मु कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, मुम्बई, और हैद्राबाद शामिल हैं। ओ.बी.आई. ने हैद्राबाद में आग से प्रभावित क्षेत्रों में आग से आहत लोगो की सहायता की थी।
Gul Afsha and Aseema
‘I thank God for the floods, because of which I could meet the Operation Blessing Team”...
कनक दुर्गा
जब विजयवाडा के भिन्न क्षेत्रों में बाढ़ आई थी तब वहाँ के अनेक क्षेत्र बहुत दिनों तक बाढ़ के पानी मे डूबे रहे थे। कृष्णा लंका का क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ...
Mariyamma
The recent floods in the district of Kurnool were a nightmare to the people living in the city of Kurnool and surrounding villages...
नागालक्षम्मा ने बाढ़ के समय सहायता पाई
नागालक्षम्मा आँध्र प्रदेश के महाबूबानगर ज़िले के कोरवीपाडु गाँव की रहने वाली 60 वर्ष की महिला है। 2 अक्तूबर जो महात्मा गाँधी का जन्म दिवस है उस दिन भारत में सरकारी छुट्टी होती...
Saritha Finds Hope To Live After The Floods
aritha a young 24 year old widow is one among the flood victims from Mulapadu of Vijayawada...
दार्जीलिंग में स्वस्थ्य सेवा
मई 2009 के आखरी सप्ताह में लगभग 200 लोग बवँडर में मारे गए जिसने पूरे बाँगला देश और पूर्वी भारत पर प्रहार किया था।......





