आपदा में पीड़ा शमन का काम
किसी भी तरह की आपत्ति जैसे भूकम्प, बाढ, तूफान या कोई दुर्घटना बिना किसी चेतावनी के आ सकती है। इसकी तीव्रता का अनुमान कोई नही लगा सकता।
कोई भी विपत्ति रातो रात लोगों के जीवन को बदल देती है। और जो लोग भयंकर मौत से बच जाते है, उन्हें दुःखों से घिरे जीवन का सामना करना पडता है जिसमें, बीमारियाँ, भूख, गरीबी, है। पीड़ा शमन का काम जल्द ही करना पडता है और आप्रेशन ब्लेसिंग अक्सर पहला संगठन है जो पहले काम पर लग जाता है।
हम पीडा शमन का काम दो रूप में करते है। तत्कालीन मदद करते है जिसमें पीडित के स्वास्थ्य का ख्याल किया जाता है। जरूरी सामग्री जैसे खाना, पीने का पानी, बर्तन, चादर दिए जाते है। पत्थरों को हटाया जाता है। इसके पश्चात लोगों को पुनर्वासित करने का काम किया जाता है। भावनाओं पर काबू लाने के लिए राय, सलाह दी जाती है। जीविका के नित्य क्रम को शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
आज तक आप्रेशन ब्लेसिंग ने आसाम, उडिसा, गुजरात में, भवण्डर, बाड और भूकम्प ग्रस्त जगहो में काम किया है। आप्रेशन ब्लेसिंग, इंडिया, ने भारत और श्री लंका में भी काम किया जब इनके किनारे, सुनामी से प्रभावित हुए।
ओ.बी.आई. सदैव प्राकृतिक संकट के समय आहत लोगों को तत्कालीन सहायता प्रदान करने में सदा कार्यशील रहती है। 15 मई 2008 तक ओ.बी.आई. ने 2,31,119 आहत लोगों की अस्थाई घरों, पका हुआ भोजन, अनाज, आवश्यक वस्तुएँ जैसे कपड़े, पकाने के चूल्हे, कम्बल, दवाएँ तथा चिकित्सा सहायता प्रदान की है।
इस कार्य को प्रभावशाली बनाने के लिए ओ.बी.आई. किसी भी संकट के समय
तुरन्त शिविर लगा कर सहायता प्रदान करती है। जैसे सुनामी, भूकम्प, बाढ़ आदि से ग्रसित क्षेत्रों में जिन में जम्मु कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, मुम्बई, और हैद्राबाद शामिल हैं। ओ.बी.आई. ने हैद्राबाद में आग से प्रभावित क्षेत्रों में आग से आहत लोगो की सहायता की थी।
रामावती - निराशा से आशा का जन्म
रामावती के लिए गर्भ धारण करना एक बड़ी मुसीबत बन गया था क्यों कि उसका गाँव बाड़ की लपेट में था और कहीं भी कोई सूखा स्थान नहीं था जहां पर वह आराम कर सके। रामावती बाकाहारी गाँव में रहती थी जो बिहार के चम्पारन ज़िले के अधीन आता है।...
चिटनी बाई ने समय पर सहायता पाई
चिटनी बाई एक ऐसी समस्या का सामना कर रही थी जो उसकी सहन शक्ति से बाहर थी। वह केवल 26 वर्ष की थी। उसके पाँच बच्चे हैं और वह अपन सास के साथ रहती है। उसका पति यह कह कर पंजाब चला गया था कि वहाँ पर कोई अच्छी नौकरी कर लेगा जिससे कुछ...
बिहार बाढ़ की गिरफ्त में
18 अगस्त 2008 से कोसी नदी जोनेपाल से नीचे आती है उसने अपना बाँध तोड़ कर अपने नियमित रास्ते को ही बदल डाला था। इस पानी के बहाव में मोड़ के कारण पूरा का पूरा बिहार बाढ़ की लपेट में आ गया था। इस बाढ़ का प्रकोप इतना भारी है था कि...
छोटे श्रवण
एक साल का श्रवण बड़ी पीड़ा से चिल्ला रहा था। उसके सारे शरीर पर फोड़े निकले हुए थे और उसकी माँ धनुशा हर प्रकार से कोशिश कर रही थी कि उसे चुप करा सके और कुछ आराम दे सके। पर ऐसा कुछ भी नहीं था जो वह उसके लिए कर सकती। बाहर कई दिन से...
मंजु देवी -मौत के मुँह से छुटकारा
चारों ओर सड़कों पर बाढ़ के कारण सड़कें ठीक नहीं थीं। निरन्तर पानी घटने के कारण अब वहाँ पर नाव का प्रयोग भी मुश्किल था। इस कारण थोड़ी दूर की यात्रा भी बहुत कठिन थी। अथाहपुर गाँव में हैज़ा फैल चुका...
बिहार ओ.बी.आई. का बाढ़ ग्रस्त इलाके में राहत कार्य
निरन्तर वर्षा के कारण उत्तरी बिहार में भारी बाढ़ आ गई थी। वहा पर शंका थी कि 126 लोग बाढ़ के करण मर चुके हैं। वहाँ रहने वाले 12 करोड़ लोग जो 19 जिलों मे रहते थे बाढ़ के प्रकोप से नहीं बच पाए थे। सब से अधिक प्रकोप तो पूर्वी और...
दुखों की राख से पुन:निर्मित्त जीवन
मई महीने की उस शाम को जो अभी भी काफ़ी गर्म थी, आशा और उसका पति मेश्राम खेतों से वापस आ रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा दूर जहाँ उनका घर था वहाँ से धूँए के काले बादल दिखाई दे रहे थे, जो पूरे आकाश में फैलते जा रहे थे। थोड़ी देर तक...
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