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22/05 2008
ऑपरेशन ब्लेसिंग स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान
स्वास्थ्य सुरक्षा
सामान्य स्वास्थ्य सुरक्षा भारतीय गाँवों के लिए एक सपना है। हालाँकि नगरों में अनेक विशेष अस्पताल हैं जहाँ पर भिन्न रोगों को इलाज हो सकता है। पर भारत के दूर अन्देश गाँवों में स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राप्त करना बहुत कठिन है। इसके साथ-साथ वहाँ पर अच्छी सड़कें और पीने का साफ पानी भी उपलब्ध नहीं होता है। गाँवों में अधिकतर लोगों को जड़ी-बूटियों द्वारा किए गए इलाज या फिर जादु-टोहने के इलाज पर ही निर्भर होना पड़ता है। सही डॉक्टरी इलाज की कमी के कारण वहाँ पर स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ती जा रही है। यहाँ तक कि अनेक स्थानों पर मृत्यु प्रबल हो जाती है।
ऑपरेशन ब्लेसिंग चिकित्सा टीम भारत में दूर-दूर गाँवों की यात्रा करके आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करती है। ये टीम पूरी तरह से चिकित्सा सुविधाओं से लैस है। उदाहरण के लिए उसके पास अपनी ई.सी.जी. मशीन, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, जाँच के यन्त्र, तथा दाँतो के इलाज में प्रयोग किए जाते हैं सभी उपलब्ध हैं। इन ऊँचे स्तर के यन्त्रों की सहायता से ओ.बी. अनेक प्रकार की जाँच करने में, बिमारियों का सही पता लगाने में, तथा उन लोगों को जो इतने भाग्यशाली नहीं है उन्हें सही दवाएँ दे कर उनके रोगों का इलाज करते हैं। ओ.बी. टीम के द्वारा आँखों की जाँच भी करती है जो गाँवें में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में ही की जाती है। यहाँ पर जिन को चश्मों की आवश्यक्ता होती है उन्हें निशुल्क चश्मे भी बना कर दिए जाते हैं। शिविर के दौरान हर बच्चे को कीड़े मारने की दवा भी नियमित रूप से दी जाती हैं। ओ.बी. की टीम इस बात का विशेष ध्यान रखती है कि हर रोगी की डॉक्टरी जाँच की जाए और उन्हें सही चिकित्सा भी दी जाए।
* ओ.बी.आई. के द्वारा 15 मई 2008 तक 3,264 निशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया था।
* शिविरों में 12, 63,741 ज़रूरतमन्द लोगों ने दाँतों, आँखों और सामान्य रोगों के लिए चिकित्सा सहायता प्राप्त की थी। इस में सारी नियमित डॉक्टरी तथा प्रयोगशाला की जाँच भी शामिल थी जो पूरी तरह निशुल्क थी।
* इन शिविरों में 2911 मोतिया बिन्द के ऑपरेशन भी सम्पन्न किए गए थे।
*इस के अतिरिक्त 61,663 चश्में भी प्रदान किए गए थे।
* 8529 गरीब लाचारों को गरीबों की देखभाल कार्यक्रम के अधीन पेट भर भोजन खिलाया गया था।
अनुशा- अव कुछ शिकायत नहीं हैं
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नन्हीं श्रवनी ने स्केबीज़ से छुटकारा पाया
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वीना कुमारी
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समराज्यम्मा – मेरे लिए एक नया चश्मा
समराज्यम्मा और उसके पति अनजया आँध्र प्रदेश के पेड्डापुलीवरु गाँव में रहते हैं। वे दोनों ही बूढ़े हैं। उनके सब बच्चे बड़े है और शादी करके दूसरे गाँवों में रहते हैं। बूढ़ी आयु का होते हुए भी समराज्यम्मा को घर का खर्चा चलाने के लिए...
भूखों के लिए भोजन की आशीष
आँध्र प्रदेश में निरन्तर 5 दिन बरिश होने के कारण बाढ़ आ गई थी जिस से निचली सतह पर रहने वाले लोगों का सामान्य जीवन तहस-नहस हो गया था। आस-पास के दो शहरों में केवल शुक्रवार और शनिवार की रात में ही 13.6 सी.एम. वर्षा हो चुकी...




