एक बोरवेल ने मनिकयम्मा को बोझ को हलका कर दिया
मनिकयम्मा पास्थला II गाँव की रहने वाली है जहाँ पर 1500 से भी कम लोग रहते हैं। यह गाँव नालगौण्डा ज़िले के दूप-अनदेश गाँवों में से एक है जिसका ठीक से विकास भी नहीं हुआ है।...
मनिकयम्मा पास्थला II गाँव की रहने वाली है जहाँ पर 1500 से भी कम लोग रहते हैं। यह गाँव नालगौण्डा ज़िले के दूप-अनदेश गाँवों में से एक है जिसका ठीक से विकास भी नहीं हुआ है। वहाँ पर केवल एक ही स्कूल है पर वहाँ स्वास्थ्य की देख भालकरने की कोई भी सविधा नहीं है। पहाड़ी इलाका होना ही यहाँ का विकास करने में भारी रुकावट है। यातायात का एक ही साधन है और वह है आर.टी. सी की बस सेवा या फिर दूसरा साधन है ऑटो।
हालाँकि मनिकयम्मा 56 साल की हो चुकी है तौ भी वह हर हर उस काम को जिसे वह कर सकती है, स्वयं ही करना चाहती है। उसका पति येसुरत्नम जो कि 59 साल का है रोज़ काम करने जाता है क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं है जो उनकी देखभाल कर सके। मनियम्मा की विशेष बात यह है कि वह न केवल 56 साल की है वरण अपने जीवन में वह अकेली है जिसने अनेक समस्याओं का सामना किया है और आज भी जीवित है। सब से पहली और सबसे बड़ी परेशानी आई थी आज से 25 साल पहले जब खेतों में का करते हुए उसकी आँख में खजूर कके पेड़ का काँटा चुभ गया था। तब नज़दकी अस्पताल उसके गाँव से 8 कि.मी. दूर था और वहाँ तक पहुँचने से पहलेही उसने अपना आँखों की रौशनी पूरी तरह खो दी थी। तब से उसे देखने में काफी परेशानी होती है और इसी लिए वह सही रूप से काम भी नहीं कर सकती है।
सो तभी से मनिकयम्मा ने खेतों पर मज़दूरी का काम करना बन्द कर दिया था। अब वह केवल घर का काम सम्भालती है। वह अपने घर का काम करने का पूरा प्रयास करती है और इस इसके साथ वह अपने पति की पूरी सहायता करती है जो कि अभी भी कमा कर घर चला रहा था। उसके लिए बोझ कुच कम होता यदि गाँव में पानी की सुविधा होती। उनके गाँव पास्थाला में केवल एक ही सार्वजनिक नल है। जिस में हफ्ते में केवल दो दिन पानी आता है। हफ्ते के बाकी दन गाँव वालों को गाँव से आधा कि.मी. दूर एक हैण्डपम्प से पानी भर कर लाना पड़ता है।
मनिकयम्मा नल से पानी लाने के लिए भी किसी की सहायता लेनी पड़ती थी। पर जब कोई भी नहीं रहता है तब उसे जैसे-तैसे पानी भरना पड़ता है। और यदि वह ऐसा नहीं कर पाती थी तो वह बहुत दुखी होती थी क्योंकि वह सोचती थी कि वह इतना सा काम भी पूरा नहीं कर सकती है, जब कि उसका पति कितना अधिक संघर्ष कर रहा है। हैण्डपम्प तक चल कर जाने से वह बहुत डरती है। क्योंकि यदि थोड़ा सा भी अंधेरा हो जाता है तो उसे कुछ दिखाई नहीं देता है। तब उसको बुरी तरह घायल हो जाने का खतरा बना रहता है।
जब ओ.बी.आई का दल वहाँ पर गया था कि वहाँ पर एक बोरवेल स्थापित कर दें तो इसे सब ने खुशी से स्वीकार किया था। वे जानते थे कि गाँव में एक बोरवेल से गाँव की पानी समस्या का हल निकल सकता है। तब ओ.बी.आई. के लिविंग वॉटर के दल ने वहाँ पर उचित स्थान खोज कर एक बोरवेल खोद दिया। यह बोरवेल मनियम्मा के घर से केवल 100 मी. की दूरी पर था। इस समाचार ने उसे बहुत ही उत्साहित कर दिया था और उसने लोगों के साथ इस के लिए खुशी मनाई। उसने अन्य लोगों के साथ मिल कर ओ.बी.आई. के दल को इस दयामय कार्य के लिए धन्यवाद भी दिया था।
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