नरसावा की एक चिन्ता कम हुई
1200 जनसंख्या का गाँव तिम्मापुर, आँध्र प्रदेश के करीमनगर ज़िले का एक दूर अन्दाज़ गाँव है जहाँ से किसी भी स्वस्थ्य सेवा के लिए कम से कम 12 कि.मी. जाना पड़ता है जो येल्लारिपेटा में है।..
1200 जनसंख्या का गाँव तिम्मापुर, आँध्र प्रदेश के करीमनगर ज़िले का एक दूर अन्दाज़ गाँव है जहाँ से किसी भी स्वस्थ्य सेवा के लिए कम से कम 12 कि.मी. जाना पड़ता है जो येल्लारिपेटा में है। हालाँकि इस गाँव में हर धर्म के लोग रहते हैं पर वे एक दूसरे से मिल कर रहते हैं। पर इस गाँव की सब से बड़ी समस्या है पानी। गाँव में एक ही कुँआ है जो लगभग सूख चुका है, यहाँ एक हैण्डपम्प भी है जो नाम के वास्ते पानी देता है।
सो वहाँ की पानी की हालत देख कर पास्टर सैम कलवाला ने ओ.बी.आई से सम्पर्क किया। तब लिविं वॉटर टीम ने आकर वहाँ की परिस्थिति का निरीक्षण किया और वहाँ पर एक बोरवेल स्थापित कर दिया। उसे इस प्रकार स्थापित किया कि किसी को भी दूर तक चल कर पानी के स्रोत तक नहीं जाना पड़ता था।
यह 35 वर्षीय नरसावा के लिए एक बड़ी आशीष थी जिसने अन्य जातियों में से निकल कर मसीही धर्म को अपनाया है। उसका पति नरसिया एक दैनिक मज़दूर है जो एक महीने मे केवल 1800 कमाता है। नरसावा और नरसिया के तीन बच्चे हैं। सतीश जो 13 साल का है और जो स्कूल में पढ़ता है वैसे ही उनकी बेटी देवावा भी जो 10 साल की है पढ़ती है। पर उनका सबसे छोटा बेटा अरुण जो 8 साल का है वह अपंग है। उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए व्हूल चेअर की ज़रूरत पड़ती है। पर उसका परिवार उसे खरीद नहीं सकता है क्योंकि नरसियाह की कमाई में ऐसा करना सम्भव नहीं है। उनकी गरीबी ने उन्हें भारी ऋण से दबा रखा है। केवल एक व्यक्ति की कमाई के कारण यह ऋण हर दिन बढ़ता ही जा रहा है।
नरसावा का पर नहीं जा सकती है क्योंकि उसे घर पर रह कर अरुण की देख भाल करनी पड़ती है जिस को हर घड़ी सहायता की ज़रूरत रहती है। घर के काम और अरुण की देखभाल और हर काम में उसकी सहायता करना तथा घर की आर्थिक स्थिति भारी चिन्ता ने नरसावा के चेहरे पर चिन्ता की रेखाएँ भर दी हैं। और अब पानी भर कर लाने की परेशानी ने उस की आशा को तोड़ कर रख दिया है कि वह कुछ अतिरिक्त काम करके कुछ कमा सके। आधा कि.मी. पर लगा हैण्डपम्प जिस में नाम मात्र पानी आता था वही नरसावा की चिन्ता का कारण था। जब भी वह पानी लेने जाती तब अरुण घर पर अकेला रह जाता था और वह के ज़रूरत पड़ने पर सहायता के लिए नहीं रहती थी। और जब तक बच्चे स्कूल से लौट कर आते थे उस समय तक अंधेरा हो जाता था और उस समय पानी भर कर लाना खतरे से खाली नहीं होता था।
परन्तु नए हैण्पम्प के द्वारा जो ओ.बी.आई. के दल ने लगाया था उसके द्वारा नरसावा को पानी अपने घर के पास ही मिल जाता है। वह इस नए निकास के कारण बहुत खुश है। उसका कहना है, “अब मैं किसी समय भी पानी भर कर ला सकती हूँ। और मुझ के विषय में चिन्ता नहीं रहती है। इस छोटे से विकास कार्य ने उसके लिए एक भारी राहत कार्य किया है। ओ.बी.आई का लगख-लाख धन्यवाद हो।”
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