पुष्पलता को मुस्कराने का कारण मिला
लक्ष्मापुर लगभग 150 पिरवारों के लिए घर है। यह छोटा सा गाँव जो आँध्र प्रदेश के नालगौण्डा ज़िले में तुंगातुरुथी से 9 कि.मी. दूर है।
लक्ष्मापुर लगभग 150 पिरवारों के लिए घर है। यह छोटा सा गाँव जो आँध्र प्रदेश के नालगौण्डा ज़िले में तुंगातुरुथी से 9 कि.मी. दूर है। यहाँ के लोगों का व्यवसाय केवल खेतों में दैनिकक मज़दूर बन कर मज़दूरी करना है। इसी गाँव में पुष्पलता रहती है।
पुष्पलता जो 50 वर्ष की स्त्री है जो अपने पति की मृत्यु के बाद से अपने बेटे और उसके परिवार के साथ पिछले दो साल से रह रही है। अपनी आयु के कारण वह कोई काम नहीं कर पाती है इस लिए उसे अपनी रोज़ की रोटी के लिए अपने बेटे और बहु पर ही निर्भर रहना पड़ता है। वह घर के काम में अपनी बहु की जितनी हो सकती है सहायता करती है। घर के छोटे मोटे काम और पानी भर कर लाना उसकी ज़िम्मेदारी है। इन में से पानी भर कर लाना ही पुष्पलता को बहुत भारी काम लगता है। उस गाँव में पानी की बहुत कमी है। गाँव में पानी का केवल एक ही स्रोत है और वह है खेतों में पानी देने के लिए खोदा गया एक खुला कुँआ जो पुष्पलता के घर से आधा कि.मी. दूर है।
फिर क्योंकि वह किसी खेत के मालिक का है सो उससे पानी भरने के लिए सब को उसकी दया पर ही निर्भर रहना पड़ता है। कभी-कभी तो वह पानी भरने की अनुमति भी नहीं देता है। इसे छोड़ कर एक और समस्या भी है और वह यह है कि उस कुँए के चारों ओर मुँडेर भी नहीं है जो पानी भरने वालों के लिए खतरा है। और एक बात कुँए की गाँव से दूरी और फिर बार-बार पानी भरने के लिए चक्कर लगाना बहुत ही थका देने वाला काम है विशेष कर किसी कमज़ोर व्यक्ति के लिए। यही बात पुष्पलता को प्रतिदिन थका कर रख देती थी। वह किसी को भी इस विषय में कुछ नहीं कह पाती थी क्योंकि उसका बेटा और उसकी पत्नी काम पर जाते थे।
एक बार जब एक प्रचारक जय कुमार उनके गाँव में आए थे तब उन्होंने गाँव वालों की पानी की समस्या को देखा था। सो उन्होंने ओ.बी.आई. से सम्पर्क किया और उन से सहायता की माँग की। तब ओ.बी.आई ने अपने एक दल को वहाँ पर निरीक्षण करने के लिए भेज दिया था और उनसे कहा था कि जैसा ज़रूरी हो वैसा उस गाँव के लिए कर देना। तब काफी जाँच पड़ताल के बाद ओ.बी.आई के दल ने एक स्थान पर बोरवेल की खुदाई शुरू की। वहाँ पर बोरवेल खोदना बहुत ही कठिन था क्योंकि कहीं पर भी पानी के लक्षण नज़र नहीं आ रहे थे। गाँव के लोग बेसबी से ओ.बी.आई के दल को देख रहे थे कि क्या उनको पानी के स्रोत की सही जगह मिली है या नहीं या क्या वे बोरवेल खोदने में सफल हुए हैं या नहीं। बहुत देर बाद निरन्तर प्रयास के बाद अन्त में पानी का सोता फूट निकला था। और उसी के साथ गाँव वालों ने चैन की साँस ली क्योंकि उनका सपना पूरा हो गया था। वे बहुत ही खुश थे। क्योंकि बरसों से उनके दिलों में दबा सपना सच हो गया था। पुष्पलता बहुत ही खुश है क्योंकि वह बोरवेल उसके घर के पास ही खोदा गया था। अब उसे दूर तक पैदल जाने के लिए संघर्ष न करना होगा। अब उसे उतनी मेहनत नहीं करनी होगी। अब वह आराम से अपना काम पूरा कर सकती है।
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