धारम्मा
55 वर्ष की धारम्मा और उसका पति नरसिंगु जो 60 वर्ष का है, वे आँध्र प्रदेश के करीम नगर ज़िले के वेंकटपुर गाँव के रहने वाले हैं।....
55 वर्ष की धारम्मा और उसका पति नरसिंगु जो 60 वर्ष का है, वे आँध्र प्रदेश के करीम नगर ज़िले के वेंकटपुर गाँव के रहने वाले हैं। उनके तीन बच्चों में से सबसे बड़ा बेटा कुछ साल पहले मर गया था। उसकी पत्नी पास की एक झुग्गी में अपने बच्चों के साथ रहती है। और वही बूढ़े नरसिंगु और धारम्मा की देखभाल भी करती है। वह अपने बच्चों और बूढ़े सास-ससुर के लिए कमाती है। नरसिंगु का सबसे छोटा बेटा गंगाधर और बेटी अपने-अपने परिवार के साथ शहर में रहते हैं।
गाँव के बड़े बुज़ुर्ग अनपढ़ हैं। वे पढ़ने की कोशिश भी नहीं करते हैं क्योंकि उनके गाँव में एक प्राथमिक स्कूल भी नहीं है। स्वास्थ्य सुविधा पाने के लिए गाँव के लोगों को 15 कि.मी.की यात्रा करके कोरूटला शहर जाना पड़ता है। गाँव मे लोगों की आजीविका का मुख्य साधन दैनिक मज़दूरी है। गाँव में पानी का एक ही स्रोत है और वह एक हैण्ड पम्प है जो लगभग सूख चुका है।
लक्ष्मी क्योंकि मज़दूरी करने जाती है इस लिए वह रुक कर पानी नहीं भर सकती है। हैणडपम्प उसके घर से काफी दूर है। और एक घड़ा भरने में काफी समय लग जाता है। इस लिए यह नरसिंगु और धारम्मा का काम है कि वे पानी भर कर लाएँ। पर क्योंकि नरसिंगु की आँख में मोतियाबिन्द है वह जाकर पानी लाने का खतरा मोल नहीं ले सकता है। वह घर पर रह कर अपने पोता-पोती की देखभाल करता है और धारम्मा जाकर पानी भर कर लाती है। उसे पानी भरने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह काम उसे बहुत थका देता है। उसकी बूढ़ी आयु इस काम को और भी कठिन बना देती है क्योंकि बीच-बीच में उसे अपने पोता-पोती की देखभाल तथा घर का काम भी देखना पड़ता है।
गाँव के पास्टर आशीर्वदम नें धारम्मा और अन्य गाँव वालों की परेशानी को देखा और उनकी सहायता करने के लिए ओ.बी.आई.से सम्पर्क किया। जब ओ.बी.आई. ने भूमि का निरीक्षण किया तो उनको धारम्मा के घर के पास की भूमि ही सब से उचित लगी। सो उन्होंने वहाँ पर खुदाई करके एक बोरवेल स्थापित कर दिया। और उसके साथ एक हैण्डपम्प भी लगा दिया। यह देख कर धारम्मा बहुत खुश हुई कि बोरवेल उसके घर के बिलकुल पास है। उसकी आँखों से खुशी के आँसु छलक आए। उसने ओ.बी.आई का धन्यवाद किया और कहा, “आप ने पानी का उपहार देकर मेरी परेशानी दूर कर दी है।” धारम्मा अब अनुभव करती है कि उस पर का भार दूर हो गया है और अब वह घर के बहुत से कामों में सहायक हो सकती है।
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