सुनीता की चिन्ता को दूर किया
हर दिन सवेरे यही सुनीता की दिनचर्या है। सवेरे जैसे ही उसकी कझोंपड़ी के बाहर मुर्गा बोलता है, मुर्गियाँ आवाज़ निकालने लगती है और सूरज उदय होने लगता है तब सुनीता अपने आप को...
नए बोरवेल ने सुनीता की चिन्ता को दूर किया
हर दिन सवेरे यही सुनीता की दिनचर्या है। सवेरे जैसे ही उसकी कझोंपड़ी के बाहर मुर्गा बोलता है, मुर्गियाँ आवाज़ निकालने लगती है और सूरज उदय होने लगता है तब सुनीता अपने आप को अपने गर्म बिस्तर से निकाल कर बहुत से कपड़ पहनती है जिससे भारी सर्दी का सामना कर सके। तब वह बाहर निकल कर पानी भरने जाती है। उस कुँए से जो उसके घर से आधा कि.मी. दूर है और जिसका पानी खेतों की सिंचाइ के लिए प्रयोग किया जाता है।
यह खुला कुँआ महाराष्ट्र के जो अहमदाबाद ज़िले में मोरचिनचोर गाँव के 350 लोगों के लिए अकेला स्रोत हैं जहाँ से पानी मिलता है। यह गाँव क्षेत्र के इतना अन्दर जाकर है कि वहाँ से तीन कि.मी. बाहर आकर ही कोई आने-जाने का साधन मिल सकता है। इस गाँव में न तो पीने के पानी, न स्कूल, न सड़कें, न स्वास्थ्य केन्द्र, न बिजली और न ही गन्दे पानी के निकास के लिए नालियों की सुविधा उपलब्ध है।
प्रकाश गंगाधल अलात और उसकी पत्नी इसी गाँव के रहने वाले हैं। वे एक कच्चे से घर में रहते हैं जिसकी छत खजूर के पत्तों से बनी है। उनके दो बच्चे हैं जिस में बेटी 5 साल की है, और बेटा 2 साल का है। वह एक गरीब परिवार है और दैनिक मज़दूरी से घर चलाता है। मज़दूरी का काम नियमित नहीं होता है इस लिए सुनीता दूसरे काम करने की कोशिश करती रहती है। वे काम करने का कोई भी अवसर जिससे पैसा कमाया जा सके, हाथ से जाने नहीं देते हैं। वे गाय भैंस तथा बकरियाँ भी पालते हैं जिससे घर का खर्चा पूरा हो सके क्योंकि उनके बच्चे अब बड़े हो रहे हैं और उनकी ज़रूरतें भी बढ़ रही हैं।
प्रकाश गंगाधर को हर दिन सवेरे सात बजे काम पर निकलना पड़ता है। इस लिए सुनीता भोर सवेरे ही उठ जाती है ताकि उस खुले कुएँ से पानी भर कर ला सके जो उसके घर से आधा कि.मी. दूर है। वह नंगे पैर ही उस रास्ते पर चल देती है जो खेतों के बीच से निकल कर जाता है और जो बहुत ही सकरा और फिसलन भरा भी है। पानी भर कर लाने के बाद उसे थोड़ा सा भी आराम का समय नहीं मिलता है। वह तुरन्त ही घर के कामों में लग जाती है। जैसे खाना बनाना बरतन धोना, साफ-सफाई करना तथा बच्चों तथा मवेशियों की देख भाल करना। जब वह कुँए पर पानी भरने जाती है तो उसे बहुत ही ध्यान से रहना पड़ता है क्योंकि एक तो वह एक खुला कुँआ है, दूसरा उसके चारों ओर कोई दिवार नहीं है। इस लिए हर समय खतरा बना रहता है कि कहीं वह कुँए में गिर न जाए। उस समय उसे एक और चिन्ता भी रहती है कि घर पर उसका बेटा जो केवल 2 साल का है वह ठीक से है या नहीं क्योंकि उस समय घर पर उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
गाँव के बहुत से परिवारों की यही समस्या है। गाँव का हर परिवार इस समसया से निबटने का संघर्ष कर रहा है परन्तु इसका कोई समाधान नहीं पा रहा है। उनकी परेशानी का समाधान उस पास्टर के द्वारा आया जो कभी-कभी उनके गाँव में आया करता था। उस पास्टर ने गाँव की समस्या के विषय में ओ.बी.आई. से सम्पर्क किया। उन की समस्या को विषय में जान कर ओ.बी.आई. की लिविंग वॉटर संस्था ने तुरन्त जाकर उस गाँव की भूमि का निरीक्षण किया और जलदी ही वहाँ पर एक हैण्डपम्प की स्थापना कर दी। यह हैण्डपम्प सुनीता के घर के बिलकुल पास था। यह उसके लिए एक अचम्भा कर देने की बात थी। अब उसे बहुत दूर उस खुले कुँए पर पानी भरने नहीं जाना पड़ेगा। इसका अर्थ यह भी था कि अब उसके पास आराम करने तथा अपने बच्चों के साथ समय बिताने का अवसर भी मिलेगा।
सुनीता के साथ-साथ गाँव के सभी लोग बहुत खुश थे और उन्हें ओ.बी.आई. का दिल से धन्यवाद और आभार प्रकट किया था।
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