FLASH NEWS: June 2010 : 21,112 people were touched through the ministry of our counseling center via inbound and outbound phone calls, letters, emails, and SMS *** 40765 people viewed the Jesus film 106 shows in Villages across rural India. *** 16269 people received medical care in 51 medical camps. 570 cataract and 2 cleft/palate surgeries were performed. 519 pairs of eye glasses were distributed to the deserving people. 1574 HIV patients were given medicines for opportunistic infections with food supplements and counseling *** 50 people gave their lives to Jesus Christ through Health Care Evangelism *** 7500 people benefited through 25 “potable water” bore wells in the villages across India *** 20688 people visited our websites <<>> ताजा समाचार: जून 2010: 16,269 लोगों ने 51 स्वस्थ्य शिविरों के द्वारा 570 मोतिया बिन्द के ऑपरेशन किए थे। 519 ज़रूरतमन्द लोगों को नज़र के चश्में प्रदान किए थे। 2 लोगो की क्लेफ्ट लिप चिकित्सा किया गया हैं *** 1574 एच.अइ.वि जरुरतमन्द लोगों को पोषण आहार दिया गाया है। 7500 लोगों ने ओ.बी.आई. द्वारा खोदे गए 25 बोर वेल से स्वच्छ पानी की सुविधा पाई थी। *** 21,112 लोगों ने पत्रों, फोन, ई-मेल और एस.एम.एस के द्वारा हम से समपर्क किया था। *** 40765 लोगों को 106 शोज जीसस फिल्म दर्शाया गया है। 20,688 लोगों ने वेबसाईट्स देखा हैं।
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OBI Changing Lives

मानवीय सेवा कार्यक्रम

विद्या ज्योति के बारे में

विद्या का अर्थ जैसे आप जानते है, शिक्षा देना है और ज्योति का अर्थ है उजाला। सो दोनों मिल कर शिक्षा के उजाले की बात करते हैं। विद्या ज्योति, ओ.बी.आई. संस्था का एक भाग है जो उन बच्चों को शिक्षा देते हैं जिनकी स्कूल जाने की सम्भावना भी नहीं होती है क्योंकि गरीबी के कारण वे पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते हैं। विद्या ज्योति में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे अनाथ हैं, स्कूलों से निकाले गए बच्चे हैं या फिर विधवा माँ के बच्चे हैं और कचरे से सामान बटोरने वाले बच्चे होते हैं। विद्या ज्योति इन सब बच्चों के दिलों को छूने के लिए कार्य करती है।

ओ.बी.आई. ऐसे पाँच केन्द्र चलाती है जो मोतीनगर, रसूलपाड़ा, गाजुलरमारम, माधवपुर (आदिताबाद) और यदगिरिगुट्टा में हैं।

मोतीनगर के बहुत से बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। उन्हें अपने छोटे भाई-बहनों की देख भाल करनी होती है क्योंकि उनके माता पिता कबाड़ा उठाने के लिए घर से सवेरे ही निकल जाते हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए ओ.बी. आई ने एक बच्चों के लिए 2004 मे आँगनवाड़ी की स्थापना की जिससे छोटे बच्चे उस समय तक वहाँ पर रह सकते हैं जब तक बड़े बच्चे स्कूल जाकर लौट कर नहीं आते हैं। अपने काम में पूरी तरह समर्पित अध्यापक इन बच्चों को शिक्षा देते हैं जिससे वह एक अर्थपूर्ण जीवन बिता सकें और एक अच्छा भविषय काक निर्माण कर सकें।

सभी 5 केन्द्रों के बच्चों को किताबें, बस्ते, जूते, स्कूल यूनिफॉर्म, और कापी-पैन्सिल इत्यादी जो कुछ उन्हें चाहिए होता है, दिया जाता है। स्कूल के कुछ बच्चों की फीस भी ओ.बी.आई. के द्वारा ही दी जाती थी। हर तीन महीने बाद उनकी स्वास्थ्य जाँच नियमित रूप से की जाती थी। साल में एक बार बच्चों को पिकनिक के लिए भी ले जाया जाता है जिससे वे भी खुशी और आनन्द का अनुभव कर सकें। उनके बीच में सारे राष्ट्रीय पर्व जैसे स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस, शिक्षक दिवस और बाल-दिवस मनाए जाते हैं।

 

विद्या ज्योति जो ओ.बी.आई. की एक सहायक संस्था है वह बैक टू स्कूल प्रोग्राम के द्वारा 921 ऐसे बच्चो की सहायता करती है जो आर्थिक रूप से कमज़ोर पाए जाते हैं। इस कार्य के लिए 8 केन्द्र स्थापित किए गए हैं। 1523 बच्चों को स्कूल बेज रहे है।

कम्पयूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम

ओ.बी.आई. को 4 जुलाई 2005 में वर्ल्ड कम्पयूटर डोनेशन बैंक की दया से उन्हें 192 कम्पयूटर दान में मिले थे। यह उपहार का दान 36 भिन्न एन.जी.ओ. और चर्चों में बाँट दिया गया था। ये सब लोग उन कम्पयूटरों के द्वारा गरीब बच्चों को कम्यूटर पर कार्य करने की मूल शिक्षा देने का प्रयास कर रहे है जिस से उस खाई को भर दें जो आज के ग्रामीण और झुग्गी झोंपड़ी के बीच केक कबच्चों में पाई जाती है।

 

ओ.बी.आई. आज इस कार्यक्रम के द्वारा 375 बच्चों और 12 शिक्षकों की सहायता कर रही है। इसके द्वारा वह विद्या ज्योति स्कूल कार्यक्रम में सहायक है। यदगिरिगुट्टा में एक सिलाई केन्द्र है जिसके द्वारा लोगों को यौन व्यापार को छोड़ कर एक दूसरा कार्य करके अपने जीवन को चलने के लिए कमाई कर सकें। अब तक वहाँ 120 महिलाओं को शिक्षा दी जा चुकी है।

 

Riya and Diksha have a new start at life

Tragedy never seemed to leave Diksha’s mom alone. When Disksha’s mom, Arati was just an infant her mother passed away...

Mithun - A new happy life

A few days before the Christmas of 2009, Pastor Mohan Pawar met 10 year old Mithun for the first time.

Swati celebrates her birthday with great joy

Swati is a muslim girl who was warmly welcomed into the Father’s Delight children’s home this year.


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