QUICK FACTS: OCTOBER 2008 : 48229 people received medical care in 93 camps 171 cataract surgeries were performed and 924 HIV patients were given medicines for opportunistic infections with food supplements and counseling. 889 Eye glasses distributed for the needy.*** 60718 people viewed the Jesus film in 256 shows *** 110 families have joined the refugee camp for Orissa Persecution Victims *** 20300 people benefited through 63fresh water bore wells *** 38683 people responded to our programs through calls, letters, email and SMS <> ताजा समाचार: आगस्त 2008 : 28322 लोगों ने सी.बी.एन के कार्यक्रमों के विषय में फोन, पत्रों, इ-मेल और एस.एम.एस के द्वारा सम्पर्क किया था। *** 46727 लोगों ने जीसस फिल्म शो को देखा था *** 48956 लोगों ने स्वास्थ्य सहायता प्राप्त की जो 93 स्वास्थ्य शिविरों द्वारा प्रदान की गई थी। उसकी सहायता सूची इस प्रकार है :189 मोतियाबिन्द को ऑपरेशन किए गए थे। 1104 लोगों को एच.आई.वी. के रोग की दवाएँ दी गई थीं। इसके साथ उन्हें पौष्टिक भोजन के साथ-साथ सह सलाह भी प्रदान की गई थी। 1882 ज़रूरतमन्द लोगों को नज़र के चश्में प्रदान किए गए थे। ** * 13400 लोगों नें 23 ताज़े पानी के बोर-वेल की सहायता से शुद्ध जल की आशीष पाई थी। ** * बोर वेल की सहायता के कारण 67 लोगों ने जीवन में उद्धार प्राप्त किया था। *** 6368 लोगों ने वेब पर सम्पर्क किया था ( सॉफ्टवेअर की किसी समस्या के कारण हम केवल शाम 8 बजे से रात 12 बजे तक का व्यौरा ले सके थे) ा
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मानवीय सेवा कार्यक्रम

विद्या ज्योति के बारे में

विद्या का अर्थ जैसे आप जानते है, शिक्षा देना है और ज्योति का अर्थ है उजाला। सो दोनों मिल कर शिक्षा के उजाले की बात करते हैं। विद्या ज्योति, ओ.बी.आई. संस्था का एक भाग है जो उन बच्चों को शिक्षा देते हैं जिनकी स्कूल जाने की सम्भावना भी नहीं होती है क्योंकि गरीबी के कारण वे पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते हैं। विद्या ज्योति में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे अनाथ हैं, स्कूलों से निकाले गए बच्चे हैं या फिर विधवा माँ के बच्चे हैं और कचरे से सामान बटोरने वाले बच्चे होते हैं। विद्या ज्योति इन सब बच्चों के दिलों को छूने के लिए कार्य करती है।

ओ.बी.आई. ऐसे पाँच केन्द्र चलाती है जो मोतीनगर, रसूलपाड़ा, गाजुलरमारम, माधवपुर (आदिताबाद) और यदगिरिगुट्टा में हैं।

मोतीनगर के बहुत से बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। उन्हें अपने छोटे भाई-बहनों की देख भाल करनी होती है क्योंकि उनके माता पिता कबाड़ा उठाने के लिए घर से सवेरे ही निकल जाते हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए ओ.बी. आई ने एक बच्चों के लिए 2004 मे आँगनवाड़ी की स्थापना की जिससे छोटे बच्चे उस समय तक वहाँ पर रह सकते हैं जब तक बड़े बच्चे स्कूल जाकर लौट कर नहीं आते हैं। अपने काम में पूरी तरह समर्पित अध्यापक इन बच्चों को शिक्षा देते हैं जिससे वह एक अर्थपूर्ण जीवन बिता सकें और एक अच्छा भविषय काक निर्माण कर सकें।

सभी 5 केन्द्रों के बच्चों को किताबें, बस्ते, जूते, स्कूल यूनिफॉर्म, और कापी-पैन्सिल इत्यादी जो कुछ उन्हें चाहिए होता है, दिया जाता है। स्कूल के कुछ बच्चों की फीस भी ओ.बी.आई. के द्वारा ही दी जाती थी। हर तीन महीने बाद उनकी स्वास्थ्य जाँच नियमित रूप से की जाती थी। साल में एक बार बच्चों को पिकनिक के लिए भी ले जाया जाता है जिससे वे भी खुशी और आनन्द का अनुभव कर सकें। उनके बीच में सारे राष्ट्रीय पर्व जैसे स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस, शिक्षक दिवस और बाल-दिवस मनाए जाते हैं।

 

विद्या ज्योति जो ओ.बी.आई. की एक सहायक संस्था है वह बैक टू स्कूल प्रोग्राम के द्वारा 950 ऐसे बच्चो की सहायता करती है जो आर्थिक रूप से कमज़ोर पाए जाते हैं। इस कार्य के लिए 8 केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

कम्पयूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम

ओ.बी.आई. को 4 जुलाई 2005 में वर्ल्ड कम्पयूटर डोनेशन बैंक की दया से उन्हें 192 कम्पयूटर दान में मिले थे। यह उपहार का दान 36 भिन्न एन.जी.ओ. और चर्चों में बाँट दिया गया था। ये सब लोग उन कम्पयूटरों के द्वारा गरीब बच्चों को कम्यूटर पर कार्य करने की मूल शिक्षा देने का प्रयास कर रहे है जिस से उस खाई को भर दें जो आज के ग्रामीण और झुग्गी झोंपड़ी के बीच केक कबच्चों में पाई जाती है।

 

ओ.बी.आई. आज इस कार्यक्रम के द्वारा 375 बच्चों और 12 शिक्षकों की सहायता कर रही है। इसके द्वारा वह विद्या ज्योति स्कूल कार्यक्रम में सहायक है। यदगिरिगुट्टा में एक सिलाई केन्द्र है जिसके द्वारा लोगों को यौन व्यापार को छोड़ कर एक दूसरा कार्य करके अपने जीवन को चलने के लिए कमाई कर सकें। अब तक वहाँ 120 महिलाओं को शिक्षा दी जा चुकी है।

 

अनुराधा – जो पीड़ा से बेसुध होकर टूट चुकी थी

अनुराधा से मिलना उसकी आयु के किसी भी बच्चे से मिलने के समान नहीं है। अनुराधा केवल 11 वर्ष की है पर इन 11 वर्षों में उसने जो देखा है और अनुभव किया है वह अनेक व्यसक अपने पूरे जीवन में अनुभव नहीं कर पाते हैं। अनुराधा बाबा साहिब और संगीता की बेटी है.....

सलोमी ने पाया अपने बच्चों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य

भीमावरम में भारी सूखा पड़ा था और शेखर और सलोमी को एक बड़ा ही कठिन निर्णय लेना पड़ा था क्योंकि वे जानते थे कि भीमावरम में रहना असम्भव था। हालाँकि यह निर्णय बहुत ही पीड़ादायक था, और बहुत सी परेशानियों का सामना करने का निर्णय था फिर भी उन्होंने हैद्राबाद चले जाने का निर्णय ले लिया। उनके दो बच्चे थे....

अर्चना

अर्चना और उसकी बहन ने एक निर्धन परिवार में जन्म लिया था। उनके माता पिता उन से बहुत प्रेम करते थे और दोनो मिल कर अच्छी कमाई कर लेते थे जिससे घर को अच्छी तरह चला सकें। जब वे ऐसा सोच ही रहे थे कि उनका जीवन बहुत से लोगों से कहीं अच्छा है अचानक से उनकी माँ की मृत्यु हो गई। माँ कि मृत्यु के साथ मानों वह स



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