QUICK FACTS: NOVEMBER 2008 : 59081 people received medical care in 106 camps. 296 cataract and 5 cleft lip/palate surgeries were performed and 1219 HIV patients were given medicines for opportunistic infections with food supplements and counseling. *** 1383 Eye glasses distributed for the needy. *** 16150 people responded to our programs through calls, letters, email and SMS *** 58549 people viewed the Jesus film in 211 shows *** 23900 people benefited through 75 fresh water bore wells *** 28033 people visited our websites.<> ताजा समाचार: अक्टोबर 2008 : 48229 लोगों ने 93 स्वस्थ्य शिविरों के द्वारा 171 मोतिया बिन्द के ऑपरेशन किए थे। तथा 924 लोगों को एच.आई.वी. रोग के लिए दवाएँ तथा पौष्टिक भोजन प्रदान किया गया था। इसके साथ उन्हें इस रोग के निषय में सलाह भी प्रदान की गई थी। 889 ज़रूरतमन्द लोगों को नज़र के चश्में प्रदान किए थे। *** 110 परिवारों ने जो उड़ीसा में सताए गए थे उन्होंने ओ.बी.आई के द्वारा आयोजित शिविरों में पनाह ली है। *** 20300 लोगों ने ओ.बी.आई. द्वारा खोदे गए बोर वेल से स्वच्छ पानी की सुविधा पाई थी। *** 17042 लोगों ने हमारी वेब साइट पर जाकर उससे लाभ उठाया था। *** 26326 लोगों ने पत्रों, फोन, ई-मेल और एस.एम.एस के द्वारा हम से समपर्क किया था। *** 60718 लोगों ने जीसस फिल्म को देखा था जिस के 256 शो आयोजित किए गए थे।
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मानवीय सेवा कार्यक्रम

विद्या ज्योति के बारे में

विद्या का अर्थ जैसे आप जानते है, शिक्षा देना है और ज्योति का अर्थ है उजाला। सो दोनों मिल कर शिक्षा के उजाले की बात करते हैं। विद्या ज्योति, ओ.बी.आई. संस्था का एक भाग है जो उन बच्चों को शिक्षा देते हैं जिनकी स्कूल जाने की सम्भावना भी नहीं होती है क्योंकि गरीबी के कारण वे पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते हैं। विद्या ज्योति में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे अनाथ हैं, स्कूलों से निकाले गए बच्चे हैं या फिर विधवा माँ के बच्चे हैं और कचरे से सामान बटोरने वाले बच्चे होते हैं। विद्या ज्योति इन सब बच्चों के दिलों को छूने के लिए कार्य करती है।

ओ.बी.आई. ऐसे पाँच केन्द्र चलाती है जो मोतीनगर, रसूलपाड़ा, गाजुलरमारम, माधवपुर (आदिताबाद) और यदगिरिगुट्टा में हैं।

मोतीनगर के बहुत से बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। उन्हें अपने छोटे भाई-बहनों की देख भाल करनी होती है क्योंकि उनके माता पिता कबाड़ा उठाने के लिए घर से सवेरे ही निकल जाते हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए ओ.बी. आई ने एक बच्चों के लिए 2004 मे आँगनवाड़ी की स्थापना की जिससे छोटे बच्चे उस समय तक वहाँ पर रह सकते हैं जब तक बड़े बच्चे स्कूल जाकर लौट कर नहीं आते हैं। अपने काम में पूरी तरह समर्पित अध्यापक इन बच्चों को शिक्षा देते हैं जिससे वह एक अर्थपूर्ण जीवन बिता सकें और एक अच्छा भविषय काक निर्माण कर सकें।

सभी 5 केन्द्रों के बच्चों को किताबें, बस्ते, जूते, स्कूल यूनिफॉर्म, और कापी-पैन्सिल इत्यादी जो कुछ उन्हें चाहिए होता है, दिया जाता है। स्कूल के कुछ बच्चों की फीस भी ओ.बी.आई. के द्वारा ही दी जाती थी। हर तीन महीने बाद उनकी स्वास्थ्य जाँच नियमित रूप से की जाती थी। साल में एक बार बच्चों को पिकनिक के लिए भी ले जाया जाता है जिससे वे भी खुशी और आनन्द का अनुभव कर सकें। उनके बीच में सारे राष्ट्रीय पर्व जैसे स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस, शिक्षक दिवस और बाल-दिवस मनाए जाते हैं।

 

विद्या ज्योति जो ओ.बी.आई. की एक सहायक संस्था है वह बैक टू स्कूल प्रोग्राम के द्वारा 950 ऐसे बच्चो की सहायता करती है जो आर्थिक रूप से कमज़ोर पाए जाते हैं। इस कार्य के लिए 8 केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

कम्पयूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम

ओ.बी.आई. को 4 जुलाई 2005 में वर्ल्ड कम्पयूटर डोनेशन बैंक की दया से उन्हें 192 कम्पयूटर दान में मिले थे। यह उपहार का दान 36 भिन्न एन.जी.ओ. और चर्चों में बाँट दिया गया था। ये सब लोग उन कम्पयूटरों के द्वारा गरीब बच्चों को कम्यूटर पर कार्य करने की मूल शिक्षा देने का प्रयास कर रहे है जिस से उस खाई को भर दें जो आज के ग्रामीण और झुग्गी झोंपड़ी के बीच केक कबच्चों में पाई जाती है।

 

ओ.बी.आई. आज इस कार्यक्रम के द्वारा 375 बच्चों और 12 शिक्षकों की सहायता कर रही है। इसके द्वारा वह विद्या ज्योति स्कूल कार्यक्रम में सहायक है। यदगिरिगुट्टा में एक सिलाई केन्द्र है जिसके द्वारा लोगों को यौन व्यापार को छोड़ कर एक दूसरा कार्य करके अपने जीवन को चलने के लिए कमाई कर सकें। अब तक वहाँ 120 महिलाओं को शिक्षा दी जा चुकी है।

 

Young Achievers

Gopal: Age 15. Sole bread winner of the family. Takes care of widowed mother and mentally challenged brother. Sells flowers in the morning before going to school.

Pramod: Age 15. Lives in a home with an alcoholic father; beating and fights are a regular feature in his house.

Naresh: Age 15. Youn

Dreams Fulfilled

'I hated my work! If I had a choice I would never so such a job. What can I do... my father couldn't find any other work because he was a farmer. We were new in the city... I had to leave my dream of studying and go about picking up rags and empty bottles from nearby liquor shops,' Ramchander's face

Changed Destiny

It was a much awaited day for seven - year - old Arun since he was going to school for the very first time. Operation Blessing India had organized their annual ‘Back to School’ programme for the slum kids of Motinagar. At these programmes OBI distributed uniforms, text books, note books, bags, shoes



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