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वर्षा By Nandini Sharma
जब हवा चल पडी सनन-सनन
जब बादल गरजे घनन-घनन,
जब बिजली नाची छनन-छनन
तब बूँदे बरसी झनन-झनन।
पानी ही पानी घर-आंगन
फिर महक उठे सब वन-उपवन ,
सब ताल-तलैया उमड पडे
तब हम भी भीगे खडे-खडे।