बाल विवाह
ऐशिया के दशिण भाग में लड़कियों की बहुत कम उम्र में शादी कर दी जाती है। भारत मे अधिकतर राजस्थान व अन्य गाँव में लड़कियों कि शादी जल्दी कर दी जाती है। जब लड़की पैदा होती है तभी उसकी शादी गाँव में पास में किसी पड़ोसी के लड़के से शादी तय हो कर देते है और जब दोनों बच्चे बड़े हो जाते हैं तब उनको शादी की गाँठ में बाँध देते है। पूवर्ज लोगो को इससे कोई मतलब नहीं होता हो कि एक छोटा लड़का क्या कमाये गा या उसका क्या भविष्य होगा मगर वह लोग परम्पराओ में ज़्यादा रूची रखते हैं। जब हम लड़की के नज़रिये से देखते हैं तब हम यह पाते हैं कि लड़की तो इतनी छोटी होती है कि उसे तो अपना अच्छा बुरा भी नहीं पता होते हैं और वह तो अपने जीवन में क्या करना है उसका फैसला भी नही कर सकती है। ऐसे केस में वह अपने आपको अपने पति और अपने ससुराल वाले के हाथों में समर्णपित कर देती है।
भारत में कानूनी तरीके से औरत की शादी की उम्र अँठारह और आदमी की इक्कीस है। बाल विवाह पर जाँच यह बताती है कि 44.5 प्रतिशित औरतो की शादी जब तक वह 18 की होती है तब तक हो जाती हैं। 22.6 प्रतिशित लोगो की शादी 16 साल से पहले और 2.6 प्रतिशित लोगो कि 13 साल से पहले ही हो जाती है। बाल विवाह की सही गिनती तो मुश्किल है क्योंकि बहुत सी शादियाँ रेजिस्टर नही है।
जो माँ-बाप अपने बच्चो की शादि कम उम्र में करा देते हैं उसके पीछे कई कारण है। गरीब परिवार यह सोच के अपनी बेटी की शादि जल्दी कर देते है क्योंकि उन्के लिए वह बोझ होते है। वह लोग ऐसा सोचते है कि बाल विवाह से उन्की बेटियाँ कामवासना से सुरक्षित रहेंगी। बाल विवाह करने से बच्चो को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता उनकी पढ़ाई रूक जाती है, एक बार लड़की की शादी हो गयी वह स्कूल जाने से वंछित रह जाती है। इससे लड़की के स्वास्थ पर भी असर पड़ता है क्योंकि वह जल्दी गर्भवती हो जाती है जिससे माँ और उसके बच्चे दोनो पर असर पड़ता है क्योंकि कई बच्चे जन्म के समय में शरीर में कमी की वज़ह से मर जाते है। कई लड़कियो को इसकी वजह से ऐडस और शारिरक सम्बध के द्वारा कई बिमारियाँ हो जाती है। इसलिए बच्चो और माँ दोनो को इसके हानिकारक प्रभाव के बारे में पता होना चाहिए।
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