FLASH NEWS: April 2010: 43869 people were touched through the ministry of our counseling center via inbound and outbound phone calls, letters, emails, and SMS *** 57323 people viewed the Jesus film in 181 Villages across rural India *** 39258 people received medical care in 106 medical camps. 282 cataract surgeries were performed. 3102 pairs of eye glasses were distributed to the deserving people. 1310 HIV patients were given medicines for opportunistic infections with food supplements and counseling. 4610 De-worming tablets were given to kids during school camps *** Another V.J Center at Bhutan (Boarders of West Bengal ) is inaugurated in this month with 18 children *** 19340 people benefited through 59 “potable water” bore wells *** 21326 people visited our websites *** <<>> ताजा समाचार: एप्रिल 2010 : 39258 लोगों ने 106 स्वस्थ्य शिविरों के द्वारा 282 मोतिया बिन्द के ऑपरेशन किए थे। 3102 ज़रूरतमन्द लोगों को नज़र के चश्में प्रदान किए थे। *** 1,310 एच.अइ.वि जरुरतमन्द लोगों को पोषण आहार दिया गाया है। 19340 लोगों ने ओ.बी.आई. द्वारा खोदे गए 59 बोर वेल से स्वच्छ पानी की सुविधा पाई थी। *** 43869 लोगों ने पत्रों, फोन, ई-मेल और एस.एम.एस के द्वारा हम से समपर्क किया था। *** 57323 लोगों को 181 शोज जीसस फिल्म दर्शाया गया है *** 4610 डी-वार्मिंग दवाईयाँ बच्चों को स्कूल कॉप में दिया गया हैं।
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हनन्याह और सफीरा

शहर में एक आदमी था जिसका नाम हनन्याह था और उसकी पत्नी थी जिसका नाम सफीरा था। दोने ने कुछ ज़मीन बेची जिससे वह परमेश्रवर को भेंट चढ़ा सके और बेचने बाद जो रूपय उनको मिलें उसमें से कुछ अपने लिए अलग कर के रख लिया। हनन्याह पैसे का कुछ भाग लाया और ले जाकर के प्रेरितों के पाँवों के आगे रख दिया। पतरस ने कहा, “हे हनन्याह ! तुम पवित्र आत्मा से झूठ क्यों बोलते हो ? तुमने जो भूमि बेची थी उसमें से अपने पास थोड़ा क्यों रखा। तुम किसी मनुष्य से नहीं बल्कि परमेश्रवर से झूठ बोल रहे हो।

ये बातें सुनते ही हनन्याह गिर पड़ा और मर गया। फिर जवानों ने उठाकर उसकी अर्थी बनाई और बाहर ले जाकर गाड़ दिया। लोगो के अंदर यह देख कर परमेश्रवर का भय आ गया कि किस तरह गलत चीज़ करने पर पर परमेश्रवर ने उसे सज़ा दिया। लगभग तीन घंटे के बाद उसकी पत्नी, जो कुछ हुया ना जानकर अपने पति को ढूँढते हुये भीतर आयी। तब पतरस ने उससे पूछा, मुझे बता क्या तुम ने वह ज़मीन इतने में ही बेची थी ? सफीरा ने उत्तर दिया हाँ, इतने में ही उसने बेची थी।

तब पतरस ने उससे कहा, यह क्या बात है कि तुम दोनों ने प्रभु के आत्मा की परीक्षा के लिए एका किया। देख तेरे पति के गाड़नेवाले द्वार पर ही खड़े हैं, और तुझे भी बाहर ले जायेंगे। सफीरा तुरंत ही उसके पाँवो पर गिर पड़ी और मर गयी। जवान जब अंदर आये तब उसको मरा हुआ पाये। तो उसके शव को भी बाहर ले जाकर उसके पति हनन्याह के पास गाढ़ दिया। सारी कलीसिया पर और जिसने भी इन बातों को सुना उन पर बड़ा भय छा गया।

कहानी का उपदेशः हम हनन्याह और सफीरा की कहानी से यह सीखते हैं कि हम जो कुछ भी परमेश्रवर के लिए देने की सोचते हैं तो हमें अपने पास कुछ नही रखना चाहिए क्योंकि हर एक को जो परमेश्रवर का है उसे देना है। हम परमेश्रवर के हिस्से में से नहीं ले सकते हैं। परमेश्रवर हर एक का बराबर से न्याय करता है।

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