सदा प्रसन्न रहो
रूबी एक कोने में उदास बैठी थी क्योंकि किसी ने उसका खाना चुरा लिया था और उसके पास भी खाने को नहीं था। अब मेरा दिन बिलकुल बेकार हो गया है, रूबी में अपने आप से कहा। एक छोटी सी बात से ही उसका पूरा दिन खराब बन गया था। और ऐसे दिन में वह छोटी से छोटी बात पर रो देती और बुड़-बुड़ाती और दुखी होती रहती थी। यह तो उसकी आदत थी इसलिए सब को पता था और उन्हें भी उसके इस व्यवहार का सामना करने की आदत सी पड़ चुकी थी। क्योंकि वे जानते थे कि जब रूबी इस प्रकार दुखी होती है तो उससे बात करने का कोई फायदा नहीं होता है।
ऐसे ही एक दिन जब रूबी बुड़-बुड़ा रही थी तो तुहिना एक हवा के झोंके के समान भीतर आई और सोमनाथ को फुटबॉल के खेल के विषय में अपना अनुभव बताने लगी कि उसने कैसा आनन्द प्राप्त किया था। और थोड़ी सी देर में वे दोनों उसके नाटकीय वर्णन पर हँस रहे थे। अनुजा भी अपने को रोक नहीं पाई और उसने पूछा, क्या चल रहा है और वह भी अपने फुटबॉल के अनुभव की कहानी सुनाने लगी। जल्दी ही बहुत से बच्चे फुटबॉल के विषय में अपना-अपना अनुभव बाँटने लगे। पर रूबी उस कमरे में बैठी खिड़की से बाहर देखती रही जैसे वह उस कमरे में थी ही नहीं।
जब सब बातें कर रहे थे तब तुहिना ने देखा कि रूबी एक दम अकेली बैठी अपने ही संसार में खोई हुई है। सो वह चुपके से खिसक कर उसके निकट आकर बैठ गई। उसने रूबी से पूछा, क्या बात है रूबी? क्या तुम्हें किसी से भी बात करना अच्छा नहीं लगता है? तब रूबी ने तुरन्त उत्तर दिया मुझे किसी से भी बात करने की इच्छा नहीं होती है। तब तुहिना बोली, ओह तो तुम किसी भी अच्छे समय में जिसका हम मज़ा लेते हैं, तुम शामिल ही नहीं होना चाहती हो। ऐसा ही है ना? इस पर रूबी उलझन मे पड़ गई और बोली, क्या मतलब है तुम्हारा?
तब तुहिना ने कहा, तुम्हें देखना चाहिए कि तुम क्या खो रही हो रूबी। देखो तुम अपने को उस सब से दूर रखती हो जो तुम्हें खुशी दे सकते हैं। क्या हुआ यदि किसी ने तुम्हारा खाना चुरा कर खा लिए, पर इसके साथ जीवन का अन्त तो नहीं हो गया है। मैं अपना खाना खुशी से तुम्हारे साथ बाँट कर खा लूँगी क्योंकि तुम मेरी सहेली हो। अगर कोई मेरा खाना चुरा कर ले जाए तो क्या तुम मेरे साथ आपना खाना बाँट कर नहीं खाओगी?
रूबी दूसरी ओर देख रही थी पर उसे लगा जो कुछ तुहिना कह रही है उस में कुछ समझदारी की बात है। तब उसने बड़ी हैरानी से तुहिना की ओर देखा। तुहिना, रूबी से कह रही थी, रूबी तुम पहले ही बहुत सा मज़ा खो चुकी हो, इन छोटी-छोटी बातों से खुद को परेशान न होने दो। कोशिश करो कि तुम हर हाल में खुश और मस्त रहो। मैं सुनना चाहती हूँ कि सब लोग कहें कि रूबी कितनी हँमुख लड़की है उसके साथ रहने में बड़ा मज़ा आता है। तुम ऐसा कर सकती हो रूबी... हाँ तुम कर सकती हो। यह कह कर तुहिना वापिस अपने मित्रों से जा मिली।
रूबी तुहिना की बातों को विषय पर विचार करने लगी। उसे लगा तुहिना सही कह रही थी। तब वह याद करने लगी उन धटनाओं को जब उसका परिवार और मित्र तो मज़ा कर रहे थे पर वह अपनी छोटी सी समस्या ले कर बैठी थी जिसने उसके मज़े को चुरा लिया था। जब भी ऐसा होता था तब वह और भी दुखी हो जाती थी। क्योंकि वह असहाय बैठी बुड़-बड़ाती रहती थी। उसे लगता था कि वह किसी दुख के बन्धन में बंधी हुई है जहाँ से कोई छुटकारा नहीं है। तुहिना ने मानो उसकी परिस्थिति को रौशन कर दिया था। उसे बहुत शान्ति मिली तह उसने सिर हिला कर खुद से वायदा किया कि अब से वह अपना दिन इस प्रकार खराब नहीं करेगी। वह हर हाल में खुश रहेगी। तब वह मुस्करा कर उठी और अपने मित्रों में जा मिली।
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