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turksec.info CBN India | कथन और कविता
FLASH NEWS: February 2010: 19825 people were touched through the ministry of our counseling center via inbound and outbound phone calls, letters, emails, and SMS *** 54375 people viewed the Jesus film in 160 shows across rural India *** 51256 people received medical care in 152 medical camps *** 275 cataract and 2 clef lip/palate surgeries were performed *** 3080 pairs of eye glasses were distributed to the deserving people *** 1310 HIV patients were given medicines for opportunistic infections with food supplements and counseling *** 15400 people benefited through 49 “potable water” bore wells in the villages across India. <<>> ताजा समाचार: फरवरी 2010 : 51256 लोगों ने 152 स्वस्थ्य शिविरों के द्वारा 275 मोतिया बिन्द के ऑपरेशन किए थे। 3080 ज़रूरतमन्द लोगों को नज़र के चश्में प्रदान किए थे। *** 1,310 एच.अइ.वि जरुरतमन्द लोगों को पोषण आहार दिया गाया है। 15400 लोगों ने ओ.बी.आई. द्वारा खोदे गए 49 बोर वेल से स्वच्छ पानी की सुविधा पाई थी। *** 19825 लोगों ने पत्रों, फोन, ई-मेल और एस.एम.एस के द्वारा हम से समपर्क किया था। *** 54,375 लोगों को 160 शोज जीसस फिल्म दर्शाया गया है
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सदा प्रसन्न रहो

रूबी एक कोने में उदास बैठी थी क्योंकि किसी ने उसका खाना चुरा लिया था और उसके पास भी खाने को नहीं था। अब मेरा दिन बिलकुल बेकार हो गया है, रूबी में अपने आप से कहा। एक छोटी सी बात से ही उसका पूरा दिन खराब बन गया था। और ऐसे दिन में वह छोटी से छोटी बात पर रो देती और बुड़-बुड़ाती और दुखी होती रहती थी। यह तो उसकी आदत थी इसलिए सब को पता था और उन्हें भी उसके इस व्यवहार का सामना करने की आदत सी पड़ चुकी थी। क्योंकि वे जानते थे कि जब रूबी इस प्रकार दुखी होती है तो उससे बात करने का कोई फायदा नहीं होता है।

ऐसे ही एक दिन जब रूबी बुड़-बुड़ा रही थी तो तुहिना एक हवा के झोंके के समान भीतर आई और सोमनाथ को फुटबॉल के खेल के विषय में अपना अनुभव बताने लगी कि उसने कैसा आनन्द प्राप्त किया था। और थोड़ी सी देर में वे दोनों उसके नाटकीय वर्णन पर हँस रहे थे। अनुजा भी अपने को रोक नहीं पाई और उसने पूछा, क्या चल रहा है और वह भी अपने फुटबॉल के अनुभव की कहानी सुनाने लगी। जल्दी ही बहुत से बच्चे फुटबॉल के विषय में अपना-अपना अनुभव बाँटने लगे। पर रूबी उस कमरे में बैठी खिड़की से बाहर देखती रही जैसे वह उस कमरे में थी ही नहीं।

जब सब बातें कर रहे थे तब तुहिना ने देखा कि रूबी एक दम अकेली बैठी अपने ही संसार में खोई हुई है। सो वह चुपके से खिसक कर उसके निकट आकर बैठ गई। उसने रूबी से पूछा, क्या बात है रूबी? क्या तुम्हें किसी से भी बात करना अच्छा नहीं लगता है? तब रूबी ने तुरन्त उत्तर दिया मुझे किसी से भी बात करने की इच्छा नहीं होती है। तब तुहिना बोली, ओह तो तुम किसी भी अच्छे समय में जिसका हम मज़ा लेते हैं, तुम शामिल ही नहीं होना चाहती हो। ऐसा ही है ना? इस पर रूबी उलझन मे पड़ गई और बोली, क्या मतलब है तुम्हारा?

तब तुहिना ने कहा, तुम्हें देखना चाहिए कि तुम क्या खो रही हो रूबी। देखो तुम अपने को उस सब से दूर रखती हो जो तुम्हें खुशी दे सकते हैं। क्या हुआ यदि किसी ने तुम्हारा खाना चुरा कर खा लिए, पर इसके साथ जीवन का अन्त तो नहीं हो गया है। मैं अपना खाना खुशी से तुम्हारे साथ बाँट कर खा लूँगी क्योंकि तुम मेरी सहेली हो। अगर कोई मेरा खाना चुरा कर ले जाए तो क्या तुम मेरे साथ आपना खाना बाँट कर नहीं खाओगी?

रूबी दूसरी ओर देख रही थी पर उसे लगा जो कुछ तुहिना कह रही है उस में कुछ समझदारी की बात है। तब उसने बड़ी हैरानी से तुहिना की ओर देखा। तुहिना, रूबी से कह रही थी, रूबी तुम पहले ही बहुत सा मज़ा खो चुकी हो, इन छोटी-छोटी बातों से खुद को परेशान न होने दो। कोशिश करो कि तुम हर हाल में खुश और मस्त रहो। मैं सुनना चाहती हूँ कि सब लोग कहें कि रूबी कितनी हँमुख लड़की है उसके साथ रहने में बड़ा मज़ा आता है। तुम ऐसा कर सकती हो रूबी... हाँ तुम कर सकती हो। यह कह कर तुहिना वापिस अपने मित्रों से जा मिली।

रूबी तुहिना की बातों को विषय पर विचार करने लगी। उसे लगा तुहिना सही कह रही थी। तब वह याद करने लगी उन धटनाओं को जब उसका परिवार और मित्र तो मज़ा कर रहे थे पर वह अपनी छोटी सी समस्या ले कर बैठी थी जिसने उसके मज़े को चुरा लिया था। जब भी ऐसा होता था तब वह और भी दुखी हो जाती थी। क्योंकि वह असहाय बैठी बुड़-बड़ाती रहती थी। उसे लगता था कि वह किसी दुख के बन्धन में बंधी हुई है जहाँ से कोई छुटकारा नहीं है। तुहिना ने मानो उसकी परिस्थिति को रौशन कर दिया था। उसे बहुत शान्ति मिली तह उसने सिर हिला कर खुद से वायदा किया कि अब से वह अपना दिन इस प्रकार खराब नहीं करेगी। वह हर हाल में खुश रहेगी। तब वह मुस्करा कर उठी और अपने मित्रों में जा मिली।

 

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Disciples of Jesus

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Simon Peter

‘Hey, come on, you are supposed to follow me’ were the words spoken to two fishermen who were busy....

संदिग्ध व्यक्ति

संदिग्ध थोमा .... अरे कितना बढ़िया नाम है ना ... मैं सोचता हूँ कि मै इस नाम से अच्छी तरह परिचित हूँ। अनेक बार मेरे मन में अनेक विषयों के बारे में अनेक प्रश्न थे। सो आईए हम देखते हैं कि यीशु के चेले को संदिग्ध थोमा क्यों कहा जाता...

 

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